बात किसान आंदोलन की

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कोरोना काल में मोदी सरकार ने तीन कृषि कानून लाकर आपदा को अवसर में बदलने का काम किया है। यह अवसर सिर्फ़ पूंजीवादी लोगों के लिए न कि आम नागरिकों के लिए!!! तीनों नए कृषि कानून एक अध्यादेश के जरिये लाया गया है, संसद में इस पर चर्चे भी नहीं हुई हैं। और राष्ट्रपति जी ने कहा कि “मेरी सरकार की तीनों कृषि कानून से 10 करोड़ लोगों को लाभ होगा” मतलब 120 करोड़ लोगों को सिर्फ़ सालाना 2 करोड़ रोजगार और हर खाता में 15-15 लाख जैसे सपने सुहाने के सेवा कुछ भी नहीं मिलेंगे!!!
इस कानून को रद करने को लेकर देश भर के किसानों ने आंदोलन छेड़ रखी है किसानों का यह आंदोलन खुद के साथ साथ देश के 130 करोड़ लोगों की भविष्य के लिए है। इस कानून में जमा खोरी की आजादी है जो देश को भयंकर बर्बादी के ओर धकेलने का काम करेगी।
हमें मालूम होना चाहिए कि किसान आंदोलन 3 महीने से जारी है। आंदोलन की जीवन में कई तरह के उतार चढ़ाव आईं इस के बावजूद ये किसी के हाथों बिके नहीं हैं । 26 जनवरी को किसानों के ट्रैक्टर परेड को बदनाम करने के लिए भाजपाई गुंडे दीप सिद्धू जैसे कुछ शरारती तत्वों ने देश के गौरव शली धरोहर लाल किले पर अपना झंडा फहराकर आंदोलन को बदनाम करने का काम किया । बहुत खुशी की बात है कि दीप सिध्धू जैसे कई देश द्रोह लोग गिरफ्तार हो गए ,और दुःख की बात यह है कि कई अच्छे भले लोगों पर मुकदमे कर देश द्रोही के आरोप लगाए और कई सोशल एक्टिविस्ट को गिरफ्तार भी किए!! 26 जनवरी को दिल्ली में लाल किले पर व पुलिस के साथ जो कुछ भी बुरा हुआ हम उस की निन्दा करते हैं।
तीनों कृषि कानून को रद करने और MSP पर कानून बनाने की मांग पर किसान आंदोलन रत हैं और किसानों का यह नारा बन चुका है जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं, तब तक हमारी घर वापसी नहीं वहीं कई चरनो के वार्ता के बाद, सरकार कानून को संशोधन करने और MSP को खत्म न करने की लिखित आश्वासन देने को अड़े हुए हैं जबकि किसान, कानून की वापसी का मांग कर रहे हैं।
एक समय था जब लोगो को लग रहा था कि आंदोलन खत्म हो जाएंगे, सरकार मन ही मन खुश हो रही थी चाटूकार पत्रकारों के सुर बदलने लगे थे…….. लेकिन अब तो हालात उल्टे ऩजर आते हैं !!!
जिस तरह आंदोलन को समाप्त करने के लिए बलो का प्रयोग किया जा था राकेश टिकैत पानी को तरस गए थे पंडालों को तोड़ा जा रहा था। ऐसी स्थिति में राकेश टिकैत की आंसू पूरे देश को एक डोर में बांधने का काम किए और देखते ही देखते किसानों की भीड़ महापंचायत में बदल गई और दूसरी राजनीतिक पार्टियों ने भी इस आंदोलन को अवसर में बदले में जुटे हैं!! पार्टियां गांव गांव जाकर किसानों को इन तीनों कृषि कानूनों के नुकसानों को बता रहे हैं अपने लिए खिसकती ज़मीन तैयार कर रहे हैं ।
आज आंदोलन का मंजर ही बदल गया है। दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल जी ने भी आंदोलन को अवसर में बदलने के लिए महापंचायतो को संबोधित करने को तैयार हैं।
आंदोलन को कमजोर करने और बदनाम करने के लिए के लिए न जाने किस किस तत्वों ने किस किस तरह के षड्यंत्र रचे कभी तो आंदोलन कारीयों को खालिस्तानी, आतंकवादी, नक्शलवादी कहा गया तो कभी इसे सिर्फ़ पंजाब के लोगों का आंदोलन बताया। इसे धार्मिक रंग से रंग देने की कोशिश भी की गई! किसान आंदोलन को शाहीन बाग से भी जोड़ा गया ! और हमारे प्रधान मंत्री जी ने तो हद ही कर दिया उन्होंने ने आंदोलन कारियों को “आंदोलन जीवी ” तक कह डाला!!!
हम समझते हैं आंदोलन जीवी शब्द का प्रयोग भारत जैसे देशों के लिए फिट बैठता है क्योंकि यहां हम भारतीय लोगों को ज़ालिमो के विरुद्ध आंदोलन करने पड़ते हैं ब्रिटिश शासन के खिलाफ भी आंदोलन जीवियों ने आंदोलन छेड़े और उन्हें देश से भगाने का काम किए आंदोलन जीवियों में महात्मा गांधी, मौलाना आजाद ,पंडित जवाहरलाल नेहरु, सरदार वल्लभ भाई पटेल, शहीद भगत सिंह और आशफाकुल्ला जैसे लोगों के नाम लिए जाते हैं । उन्होंने ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़ने पर मजबूर किए थे और आज के आंदोलन जीवी राकेश टिकैत और युध्द वीर सिंह जैसे लोग Jio के वाई फाई से चलने वाली जुमला जीवी सरकार को सत्ता से बाहर निकालेंगे!! क्योंकि राकेश टिकैत की आंसू और आंदोलन में 200 से अधिक शहीद किसानों के खून ध्रुमित नहीं होंगे, अब लड़ाई आर पार, करो या मरो की जारी है। जय जवान जय किसान के नारे गूंज रहे हैं।
लेख पढ़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

लेखक : सद्दाम रिफ-अत, मानू माडल स्कूल, हैदराबाद