कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद की इस्तीफ़ा किसी धमाके से कम नहीं

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बांका (सद्दाम रिफअत )गुलाम नबी आज़ाद के इस्तीफे के साथ ही राजनीतिक हलचलें तेज हो गई है। लोग अपने अपने तौर से आज़ाद के इस्तीफा मतलब निकाल रहे हैं।

बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद अपनी सभी पदों से ,कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को 5 पन्नों का इस्तीफ़ा भेजा है। उनका इस्तीफा ऐसे समय है जबकि कांग्रेस के अध्यक्ष सोनिया गांधी इलाज के लिए विदेश गए हुए हैं। इस्तीफा में उन्होंने कहा कि बड़े अफसोस और बेहद भावुक दिल के साथ मैंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपना आधा सदी पुराना नाता तोड़ने का फैसला किया है.” साथ ही उन्होंने कहा, कि भारत जोड़ों यात्रा की जगह कांग्रेस जोड़ो यात्रा निकालनी चाहिए.
आजाद के समर्थकों में से 5 अन्य लोगों ने भी इस्तीफा दिए हैं साथ ही और कई नेता कांग्रेस को अलविदा कह सकते हैं।
आजाद कांग्रेस से आजाद हो कर एक अलग पार्टी बनाने वाले हैं। या भाजपा के दान पकड़ने वाले है यह दिलचस्प होने वाला है।

इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया आने लगी है सब लोग गुलाम नबी आज़ाद पर इलजाम लगहोगाें जुटे हैं हांलाकि 5 पेज के इस्तीफे को गंभीरता से लेनी चाहिए

गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों के रिएक्शन आ रहे हैं जानते हैं किसने किया कहा!!

राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के ओर से जिम्मेदाराना बयान देते हुए कहा कि
जो डरपोक हैं उसे बाहर करना चाहिए और जो निडर हैं उन्हें कांग्रेस में लाने जाए !!

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान हिमंत सरमा ने कहा,

“आजाद और मेरे लिखे गए इस्तीफे में काफी समानता हैं. सबको पता है कि राहुल गांधी अपरिपक्व और अप्रत्याशित नेता है.” उन्होंने कहा, “मैंने 2015 में ही कहा था कि कांग्रेस में सिर्फ गांधी रह जाएंगे.”

उन्होंने ट्विटर पर लिखा- जिस व्यक्ति को कांग्रेस नेतृत्व ने सबसे ज़्यादा सम्मान दिया, उसी व्यक्ति ने कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत आक्रमण करके अपने असली चरित्र को दर्शाया है. पहले संसद में मोदी के आंसू, फिर पद्म भूषण, फिर मकान का एक्सटेंशन. यह संयोग नहीं सहयोग है !
सचिन पायलट
गुलाम नबी आज़ाद जी के इस्तीफे की टाइमिंग दुर्भाग्यपूर्ण
लगभग 50 साल तक युवा कांग्रेस, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष जैसे पदों पर रहने के बाद आज संघर्ष का समय था।
चिट्ठी में लिखी उनकी बातें सच से परे हैं और वो जिम्मेदारी से पीछे हटे हैं
राजस्थान के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत
कांग्रेस ने जिन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने के साथ-साथ 42 साल तक महत्वपूर्ण पद पर रखा; ऐसे समय में उनसे ऐसे पत्र की उम्मीद किसी ने भी नहीं की थी
पवन खेड़ा
जो आदमी आज धोखा देता है पार्टी को, उस आदमी का रिमोट कंट्रोल नरेंद्र मोदी के हाथ में है।
एक के बाद एक पद गिनाए जा रहे हो और कहते हो कि सेल्फलेस सर्विस की, आरे वाह ऐसे सर्विस तो सब को करनी चाहिए,
यही लोग थे पार्टी को कमजोर करने वाले!
सुनील जाखड़ भाजपा नेता
गुलाम नबी आज़ाद ने ऐसा क्यों किया इस की जांच के बजाए कांग्रेस आरोप लगा रही है।
फारूक अब्दुल्ला
बातचीत से मसले को हल किया जा सकता है उन्हें बहुत चोट पहुंची होगी।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उन्होंने कहा, ‘गुलाम नबी आजाद कांग्रेस में रहकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे. कांग्रेस पार्टी ने उनको वह सारी ज़िम्मेदारियां दी जो दी जा सकती थीं लेकिन फिर भी वे खामियां निकालते रहे. उनके जाने से पार्टी को कुछ नुकसान नहीं होगा’

शक्ति सिंह गोहिल
गुलाम नबी आज़ाद जी को कांग्रेस ने जीरो से हीरो बनाया, कांग्रेस ने उन्हें बहुत कुछ दिया।

कांग्रेस ने गुलाम नबी आज़ाद जी को जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री बनाया, महासचिव बनाया, कार्यसमिति का सदस्य बनाया, राज्यसभा में LoP बनाया
श्री श्रीनिवास बी.वी
जब तक ‘CM’ पद, ‘Union Minister’ पद, LoP पद, Rajya Sabha सीट ‘गुलाम’ रही, तब तक सब ठीक था!!

50 वर्षों बाद जब संघर्ष का दौर आया, पार्टी के कर्ज को उतारने की नौबत आयी तो ‘आजाद’ हो गए।
श्री श्रीनिवास बी.वी
जब तक ‘CM’ पद, ‘Union Minister’ पद, LoP पद, Rajya Sabha सीट ‘गुलाम’ रही, तब तक सब ठीक था!!

50 वर्षों बाद जब संघर्ष का दौर आया, पार्टी के कर्ज को उतारने की नौबत आयी तो ‘आजाद’ हो गए।