किसान आंदोलन के छ: माह फ़िर भी क्यों बे असर

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बीते वर्ष कोरोना काल में तीन कृषि कानून बनाया गया, जब सब भारतीय अपने घरों में रह कर देश सेवा कर रहे थे।
जिसके विरुद्ध किसानों ने देश व्यापी आंदोलन पीछले छ: महीनों से छेड़ रखी है। इस आंदोलन के समर्थन में12 प्रमुख विपक्षी दलों द्वारा जारी संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया है।
इनका कहना है कि “हम 26 मई, 2021 को साहसिक और शांतिपूर्ण किसान संघर्ष के छह महीने पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) द्वारा देशव्यापी विरोध दिवस मनाने के आह्वान का समर्थन करते हैं।
12 मई, 2021 को हमने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री मोदी को यह कहते हुए पत्र लिखा था:-
-“हमारे लाखों अन्नदाताओं को महामारी का शिकार होने से बचाने के लिए कृषि कानूनों को निरस्त करें ताकि वे भारत के लोगों का पेट भरने के लिए अन्न का उत्पादन जारी रख सकें”-
हम कृषि कानूनों को तुरंत निरस्त करने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार सी2+50 प्रतिशत के फार्मूले के आलोक में न्यूनतम समर्थन मूल्य के वैधानिक अधिकार की मांग करते हैं।
केंद्र सरकार को अपना अड़ियल रवैया छोड़ना चाहिए और किसान संयुक्त मोर्चा के साथ पुन: बातचीत आरंभ करनी चाहिए”
अंत में 12 प्रमुख विपक्षी दलों के प्रमुख ने हस्ताक्षर कर सरकार को चेतावनी दिया। है।
हस्ताक्षरकर्ता,
सोनिया गांधी (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)
एचडी देवगौड़ा (जेडी-एस)
शरद पवार (एनसीपी)
ममता बनर्जी (टीएमसी)
उद्धव ठाकरे (शिवसेना)
एमके स्टालिन (डीएमके)
हेमंत सोरेन (झामुमो)
फारूक अब्दुल्ला (जेकेपीए)
अखिलेश यादव (सपा)
तेजस्वी यादव (राजद)
डी राजा (भाकपा)
सीताराम येचुरी (माकपा)