109 साल में बिहार ने किया पाया किया खोया

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Bihar Bihar आज बिहार दिवस है यानी आज ही के दिन 22 मार्च 1912 में इस राज्य की स्थापना हुई थी.
राज्य के गठन को मद्देनजर रखते हुए हर साल 22 मार्च को बिहार दिवस मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष की तरह 2021 को भी बिहार दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया । इतिहास की 109 वी साल में बिहार ने किया कुछ पाया और किया कुछ खोया इस विषय पर लोगों को मंथन करते हुए देखा गया!!
22 मार्च 1912 बिहार बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग एक राज्य बना जिसमें उड़ीसा व झारखंड भी शामिल था।
*क्षेत्रफल के हिसाब से बिहार , भारत का बारहवां सबसे बड़ा , और आबादी के हिसाब से तीसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है*
1936 में उड़ीसा बिहार से अलग हो गए फिर भी बिहार खनिज पदार्थों के मामले में अग्रणी माने जाते थे।
1947 को आजादी के पश्चात बिहार झारखंड 15 नवंबर 2000 तक बिहार साथ रह कर झारखंड नामक एक नया प्रदेश बिहार से अलग हो गया ।
*जब झारखंड बिहार में था बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खनिज और वन संपदा से निर्देशित था। लोहा, कोयला, माइका, बाक्साइट, फायर-क्ले, ग्रेफाइट, कायनाइट, सेलीमाइट, चूना पत्थर, युरेनियम और दूसरी खनिज संपदाओं की प्रचुरता की वजह से यहाँ उद्योग-धंधों का जाल बिछा है। जो बिहार की ताकत थी* । खनिज उत्पादों के खनन से बिहार को झारखंड प्रांत से सालाना तीस हजार करोड़ रुपये की आय होती थी।। बिहार न केवल अपने उद्योग-धंधों में इसका इस्तेमाल करता था। बल्कि दूसरे राज्यों को भी इसकी पूर्ति करता था।
झारखण्ड में भारत के कुछ सर्वाधिक औद्योगिकृत स्थान यथा – जमशेदपुर, राँची, बोकारो एवं धनबाद इत्यादि स्थित हैं। बिहार के उद्योगों में कुछ प्रमुख यह भी शामिल थे।
भारत का सबसे बड़ा उर्वरक कारखाना सिंदरी बिहार में स्थित था जो अब बंद हो चुका है।
भारत का पहला और विश्व का पाँचवां सबसे बड़ा इस्पात कारखाना *टाटा स्टील जमशेदपुर* में बिहार में था जो अब झारखंड का हिस्सा है।
एक और बड़ा इस्पात कारखाना *बोकारो स्टील प्लांट बोकारो में बिहार में* था जो अब झारखंड में है।
भारत का सबसे बड़ा आयुध कारखाना गोमिया में बिहार में था जो अब झारखंड में है। आदि
अब झारखंड बिहार का यंग सुपुत्र है जिस की उम्र महज 21 साल है। खनिज पदार्थों के मामले में बिहार के सुपुत्र झारखंड अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं । 2000 में बिहार से विभाजन के बाद झारखंड का जीडीपी 2004 में 14 बिलियन डालर आंका गया था ।
बड़ा बेटा उड़ीसा भी अब बुढापे की ओर अग्रसर है जिसकी उम्र 85 वर्ष है ।
80% लोग खातों पर निर्भर हैं ।
बाप बिहार की उम्र 109 साल के होते हुए भी अपने बच्चों पर डिपेंड नहीं है खुद आत्म निर्भर की गाथा गाए जा रहे हैं। बिहार के पास खनिज संपदा के रूप में सिर्फ़ बालू बचे हुए हैं फ़िर भी बिहार विकास की ओर अग्रसर है ।
1946 से अब तक 25 अलग अलग मुख्य भी आए । और अपने अपने अंदाज में बिहार को सजाने व संवारने में जुटे रहे । आज बिहार के पास जो सबसे बड़ी ताकत है वह आई ए एस और आई पी एस पैदा करने की है। जो पूरे भारत को को सप्लाई करते हैं । जय बिहार, जय विकास, जय भारत!!