ढलते सूरज की संदेश!!

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प्रत्येक दिन सांझ के समय जब सूर्य पश्चिम की ओर जाने लगता है तो हमें यह कह रहा होता है कि मैं डूब नहीं रहा हूँ, मैं तो बस एक निश्चित समय अंतराल के लिए अदृश्य हो रहा हूँ, इसलिए कि मुझे एक नई आशा, एक नई उमंग के साथ एक शानदार और अनमोल सी सुबह लाना है! एक ऐसी सुबह जो समस्त मानव जाति के लिए समान रूप के अवसर लाने वाली है, अपके सपनों को साकार करने के लिए नई उमंगें और मजबूत इरादों के साथ साथ एक दृढ़ विशवास उतसर्जित करने वाली है, जिसका सही उपयोग कर मानव अपना गंतव्य मंजिल को पा सकता है
और साथ ही सूर्य यह भी कह रहा होता है कि जब मैं आपको इतना उत्तम प्रकार का उपहार देने वाला हूँ इसके लिए आपको कष्ट तो उठाना ही पडेगा, कुछ समय के लिए ही सही लेकिन मेरे बिना आपको तो रहना ही पड़ेगा, सहज शब्दों में कहूँ तो सूर्य यह कहना चाहता है कि अगर आपको अच्छे उपहार चाहिए है यानि सुबह चाहिए, तो फिर आपको कष्ट करना होगा, उजाला के लिए कुछ पल ही सही पर अंधकार में रहना होगा,यानि “सफलता के लिए मेहनत करनी होगी” तब जाकर आपको यह उपहार मिल पाएगा!

अब्दुल्लाह रिफ्अत