महागठबंधन ,सरकार बनाने की आस क्यों नहीं छोड़ रही है?

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2015 राजद 80 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी और 2020 में भी 75 सीटों के साथ बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बन कर ऊभरी हैं।
2015 में नीतीश कुमार दूसरी बड़ी पार्टी थी जब कि 2020 में भाजपा दूसरी सब से बड़ी पार्टी है।
ए आई एम आई एम यानी ओवैसी की पार्टी पांच सीटों के साथ छठे सब से बड़ी पार्टी बनी है ।
भाजपा की 74 सीटें व नीतीश जी की 43 सीटें ,दोनों की कुल 117 सीटें बहुमत से पांच कदम दूर, बहुमत साबित करने के लिए जीतन राम मांझी की 4 चारों सीटें व वीआईपी की चारों सीटों की सहयोग जरूरी है।
चुनाव के दौरान जिस प्रकार भाजपा, चिराग जलाकर नीतीश कुमार के घर को जलाने का प्लानिंग पर काम किये थे ।नीतीश जी के मन को विचलित कर दिए हैं। यही वजह है कि नीतीश कुमार अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं। नीतीश कुमार जी की खामोशी तेजस्वी जी की दिल की धड़कन को बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
दूसरी बात जीतन राम मांझी को नीतीश कुमार बुरी तरह धोखा दे चुके हैं, कुर्सी पर बैठा कर कुर्सी खीचने का काम किए कर चुके हैं। मांझी बहुत दिनों से मौके के तलाश में थे मौका गनीमत है फुल शाट खेलने का मौका, मांझी जैसे दिग्गज नेता हाथ से नहीं जाने देंगें, तेजस्वी को स्पोर्ट कर धोखे का बदला सम्मान से , साथ ही मंत्री मंडल में जगह !!!
राजद 75 + कांग्रेस 19 + लेफ्ट 16 = 110 + मीम का 5 + हम का 4 + वीआईपी का 4= 123 तो यही मंत्र है जो अभी तक तेजस्वी सरकार बनाने की आस में है।
आप की क्या राय है क्या महागठबंधन की सरकार बन पाएगी , कितनी % चान्स है इस नए गठजोड़ सरकार की!!!
सद्दाम रिफअत, टी जी टी सामाजिक विज्ञान ,मानू माडल स्कूल हैदराबाद