वैश्विक महामारी कोरोना ने बिहार सरकार की विफलताओं को दर्शाया है और यह उजागर किया है कि बिहार सरकार युवाओं को रोजगार देने के मामले में सब से पिछड़े हैं
बिहार से बाहर फंसे मजदूरों की पंजीकृत संख्या तकरीबन 38 लाख है जिसमें से सिर्फ 15 से 20 लाख ही बिहार लौट पाए हैं इन मजदूरों को घर पर ही काम दिए जाने के मामले में अखबारों और टीवी चैनलों में सुर्खियां बटोर रहे थे
अभी तक तालाबंदी खत्म हुए नहीं कि मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है।
बसों में
इस बस की तसवीर देख रहे हैं यह उन हजारों बसों में से एक है जो मजदूरों को बिहार से बाहर ले जा रही है।
अब प्रश्न यह उठता है कि 50 लाख मजदूरों को रोजगार देने की बात कर रहे थे पर यह क्या हो रहा है 50% मजदूरों को भी रोजगार नहीं दे पा रहे हैं ।
कथनी करनी में अंतर है विहार वासियों को सोचने की जरूरत है।
लेखक : सद्दाम रिफ्अत, टी जी टी, सामाजिक विज्ञान, मानू माडल स्कूल, हैदराबाद।