सरकार को नैतिकता दिखाने की जरुरत हैं

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कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी से लडऩे की मुख्य हथियार तालाबंदी को माना जा रहा है ।
हमें नहीं मालूम कि तालाबंदी कोरोना को कहां तक रोक पा रही है पर इतना सत्य है कि कोरोना वायरस से ज्यादा भूख गरीबों की जान ले रही है ।
इस तालाबंदी में प्रवासी लोगों की तकलीफ़ को देख कर यह गाना याद आती है
दुनिया में कितना गम है
मेरा गम कितना कम हो
लोगों का गम देखा तो
मैं अपना गम भूल गया!!
यह सिर्फ गाना ही नहीं समाज का आईना है
इस तालाबंदी में लोगों की जिन्दगी अजीरऩ बन गई है ऐसे ऐसे विडियो सामने आते हैं जिसे देखकर आँखें नम हो जाती है और फिर अपनी गम, कम लगने लगती है।
कोरोना की कोरोनालाजी को समझा जाए तो यह अमीरों की मार गरीबों को झेलनी पड़ती है।
आप ने सुना है कनिका कपूर व नमस्ते ट्रंप ने लाखों लोगों को संक्रमित किए!
30 जनवरी को ही भारत में कोरोना दस्तक दे चुका था। इसके बावजूद हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी अमेरिका के राष्ट्रपति और उनके फैमली के साथ मोटेरा स्टेडियम में एक लाख दस हजार लोगों के साथ कोरोना को बढ़ावा देने में लगे हुए थे।
मध्य प्रदेश में शिवराज मोदी जी की नेतृत्व में विधायकों की खरीद में लगे हुए थे। कनिका कपूर पार्टी में कोरोना की नुमाइश में लगी थी।
हमारे प्रधान मंत्री कितनी सफ़ाई से झूठ बोल गए कि हम बाहर से आने वाले की स्क्रीनिंग बहुत पहले से शुरू कर दिए थे।
प्रश्न यह है कि जब आप स्क्रीनिंग शुरू कर दिए थे तो कनिका कपूर कोरोना ले कर पार्टी में कैसे पहुंची!?
और जमाती लोग कोरोना ले कर मरकज कैसे पहुचें!!??
यानी मोदी है तो मुमकिन है!!
लाकडाउन की शुरुआत जनता कर्फ्यू नाम से शुरू करते हैं और उस की मार प्रवासी मजदूर झेल रही है ।
ताली थाली व मोमबत्ती के अलावा मोदी जी ने भाषण भी दिए हैं इस के अलावा लाकडाउन 3.2 हो गए गरीब मजदूर जनता को कुछ दिए हों तो बताएं !!???
लोगों के पास खाने को रोटी नहीं, हाथ में रूपए नहीं हैं ,जलाने को गैस नहीं लकड़ी चुन चुन कर खाना बनाते हैं, कुछ लोग डंडे खाकर रिलीफ का खाना लाते हैं, दो दो चार चार दिन से लोग भूखे प्यासे रह रहे हैं कहीं से दो वक्त की रोटी बड़ी मुश्किल से मिल जाती है । केंद्र सरकार इतनी बेशर्म हो गई कि इन मजदूरों को घर पहुंचाने के बदले में किराया भी वसूल रही है , यानी मोदी है तो ही मुमकिन है ।
हद हो गई यार कोरोना फैलाए आप! और भोक्ते गरीब मजदूर !! यह कहां का इंसाफ है!!??
ये मजदूर हमारे देश की रीढ़ की हड्डी है, इस मानव पूंजी को बजाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
आपदा प्रबंधन के लिए लालू जी बेहतरीन प्रदर्शन किए थे । लोगों के लिए फ्री गाड़ियां चलाईं थी ।
आज भी सेवाएं फ्री होनी चाहती है।

लेखक : सद्दाम रिफ-अत, टी जी टी सोशल साईंस, मानू माडल स्कूल, हैदराबाद